بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो निहायत रहम करने वाला और मेहरबान है

ख़ुशी हैसिर्फ़ अल्लाह की इताअत में

अल्लाह ने हमें सिर्फ़ उसी की इबादत के लिए पैदा किया है — मुकम्मल इताअत के साथ, हर तरह की बुतपरस्ती से आज़ाद होकर। यही इंसानियत के लिए अल्लाह का आख़िरी पैग़ाम है।

”
अल्लाह के नज़दीक सिर्फ़ इस्लाम (इताअत) ही सच्चा दीन है।
— क़ुरआन 3 : 19
एक मिनट में

अल्लाह ने हमें सिर्फ़ अपनी इबादत के लिए पैदा किया। इंसानियत के लिए उसका आख़िरी पैग़ाम क़ुरआन है। इताअत का मतलब है ख़ुद को सिर्फ़ अल्लाह के लिए समर्पित करना — न कोई साझीदार, न कोई बिचौलिया, न कोई बुत। यहाँ आप क़ुरआन मुफ़्त पढ़ सकते हैं, किताबें पढ़ सकते हैं और सुबूत ख़ुद परख सकते हैं।

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क़ुरआन तस्वीरी पैग़ाम

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क़ुरआन आयत की तस्वीर
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पाँच मिनट में ख़ुद जाँचिए

क़ुरआन में 19 की संख्या पर आधारित एक गणितीय निशानी है। इन सीधी बातों को जाँचने के लिए किसी औज़ार की ज़रूरत नहीं:

  • क़ुरआन में 114 सूरतें हैं, यानी 19 × 6।
  • इसमें 6346 आयतें हैं, यानी 19 × 334।
  • पहली आयत बिस्मिल्लाह में ठीक 19 अक्षर हैं।
पूरा 19 कैलकुलेटर खोलें
6346 या 114 आज़माइए। बहुत लंबी संख्याएँ भी चलती हैं।
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रोज़ की आयतें और याद-दहानी

रोज़ की क़ुरआनी आयतें, गणित का करिश्मा और रूहानी याद-दहानी, इंशा'अल्लाह।

"ऐ मेरे रब, मेरा इल्म बढ़ा दे" — क़ुरआन 20:114

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